Home Uncategorized दुर्ग के निजी स्कूलों के मनमानी पर बढ़ा अभिभावकों का आक्रोश…

दुर्ग के निजी स्कूलों के मनमानी पर बढ़ा अभिभावकों का आक्रोश…

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अभिभावकों ने की ये शिकायत……

जिले के निजी स्कूल संचालकों के द्वारा प्रतिवर्ष नर्सरी से लेकर कक्षा आठवीं तक के सिलेबस में प्रकाशक (लेखक) बदल दिया जाता है, जिसके बाद वह पुस्तक अगले वर्ष रद्दी हो जाती है। किसी के भी कोई काम की नहीं रह जाती, जिसके कारण पालकों को प्रतिवर्ष बच्चों के लिए नए प्रकाशक की पुस्तक खरीदना मजबूरी हो जाती है और जिसकी कीमत 4,000₹ से 5000₹ के आसपास होती है। जिससे यह साफ प्रतीत होता है कि निजी स्कूल प्रबंधन मोटी कमीशन के लालच में हर वर्ष प्रकाशक बदलता है, जिससे पालक हर वर्ष नई पुस्तक खरीदें और स्कूल प्रबंधन को कमीशन के रूप में मोटी रकम मिले। कमीशन के इसी क्रम में हर वर्ष बच्चों का ड्रेस कोड भी बदल दिया जाता है, जो कि सरासर अन्याय है। जिस पर शिक्षा विभाग द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही अभी तक नहीं की गई है। जिससे साफ प्रतीत होता है कि शिक्षा विभाग, निजी स्कूल प्रबंधन एवं चंद बुक डिपो वाले, चंद ड्रेस बेचने वाले दुकानदार के बीच सांठ-गांठ कर पालकों को आर्थिक रूप से ठगने का कार्य किया जा रहा है।

अभिभावकों की महत्वपूर्ण माँग…..

  1. निजी स्कूल प्रबंधन, चंद बुक डिपो एवं चंद ड्रेस बेचने वाले दुकानदारों के द्वारा कॉपी, पुस्तक एवं ड्रेस कोड के नाम में जो मोटी कमीशन का खेल किया जा रहा है, उन सभी की जांच कर उचित कार्यवाही की जानी चाहिए।
  2. सभी निजी स्कूलों द्वारा कक्षा आठवीं तक के वर्ष 2026-27 में जो प्रकाशक की पुस्तकें लागू की गई हैं, वह कम से कम 5 वर्ष तक अनिवार्य किया जाए।
  3. बच्चों के ड्रेस कोड को भी 5 वर्ष के लिए अनिवार्य किया जाए।
  4. अगर 5 वर्षों के बाद प्रकाशक बदलने की आवश्यकता होती है, तो नये प्रकाशक वाले सिलेबस का जिला शिक्षा अधिकारी से अनुमोदन अनिवार्य किया जाए एवं अनुमोदन लिस्ट स्कूल के नोटिस बोर्ड में चस्पा किया जाए एवं स्कूल के वेबसाइट में अपलोड किया जाए और यह सब सत्र शुरू होने के कम से कम 3 महीने पहले किया जाए।